Saturday, 8 July 2017

बारिश


anu Mehta

भीगते रहते है बारिश में अक्सर, कभी माँगी किसी से पनाह नही.

हसरते पूरी ना हो तो ना सही, ख्वाब देखना तो कोई गुनाह नहीं.